मुरादाबाद : एक तरफ केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार किसानों किस के लिए नई नई योजनाएं ला रही है और किसानों की हर संभव मदद करने का दावा कर रही है। दूसरी तरफ जिला प्रशासन है कि किसानों की समस्या को अनदेखा करता रहता है। कई बार तो जिला प्रशासन की इस अनदेखी के कारण किसानों पर अत्याचार भी होने लगते हैं। फिलहाल अत्याचार का ऐसा ही एक ताजा मामला जिला मुरादाबाद के एक छोटे से गांव भिकनपुर से सामने आया है। जहां एक दबंग स्कूल संचालक ने एक किसान के खेत में खड़ी फसल को उजाड़ दिया गया। किसान का आरोप है कि दबंग ने ये दबंगई जिला प्रशासन से सांठगांठ कर दिखाई जिसके कारण प्रशासनिक अधिकारी उसकी कोई मदद नहीं कर रहे हैं।

मामला मुरादाबाद के एक छोटे से गांव भीकनपुर का है जहां पर प्रेमपाल नाम का व्यक्ति अपनी बीवी और बच्चों के साथ रहता है। प्रेमपाल किसान है। गांव में उनकी करीब 3 बीघा जमीन है। दिन रात मेहनत करके खेती से हुई कमाई से वह अपने बच्चो का गुजारा करता है। खेत के बगल में सतवीर सिंह का स्कूल है। प्रेमपाल सिंह के मुताबिक सतवीर सिंह काफी लंबे समय से अपने खेत की जमीन उन्हें दे देने का दबाव बना रहे थे। क्योंकि प्रेमपाल सिंह का पूरा परिवार खेती की उसी जमीन पर गुजर बसर करता है, इसलिए उन्होंने जमीन सतवीर सिंह को नहीं दी। यह मामला फिलहाल तहसील न्यायालय में वाद के रूप में चल रहा था। जिसमें 22 जून को सतवीर सिंह के पक्ष में निर्णय आ गया । प्रेमपाल सिंह का आरोप है कि वह आर्डर की कॉपी पाने के लिए वह लगातार तहसील के चक्कर लगा रहे थे लेकिन उन्हें फैसले की कॉपी नहीं दी गई । जब वह शनिवार को तहसील में पहुंचे तब भी उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि अभी उस पर सिग्नेचर नहीं हुए हैं । और अगले दिन खेत में खड़ी फसल को जलाककर हल चला दिया गया । प्रेमपाल सिंह का कहना है कि उनके खेत में गन्ने की फसल तैयार खड़ी थी और इसके साथ ही बाजरा भी तैयार था और उन्हें बिना कोई सूचना दिए पुलिस और तमाम प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में फसल पर हल चला दिया गया । अब वहां पर पिलर लगा कर बाउंड्री की जा रही है। उन्हें फैसले की कॉपी इसलिए नहीं दी गई ताकि वह आगे कहीं अपील न कर सके। प्रेमपाल सिंह ने कहा है कि यदि उन्हें न्याय मिल सकता है तो उन्हें न्याय दिया जाए।

बाइट:-प्रेमपाल सिंह(पीड़ित)

जिस तरह प्रेमपाल सिंह ने अपने बयान में बताया है, अगर वह सच है, तो यह सच कई सवाल खड़े करता है। आखिर वाद में आदेश आ जाने के बाद उन्हें आदेश की कॉपी क्यों नहीं दी गई ? उन्हें शनिवार तक लटकाया गया और रविवार को खेत में बुलडोजर चला दिया गया ? जहां एक तरफ सारे प्रशासनिक अधिकारी कोरोना के खिलाफ जारी जंग में मोर्चा संभाले हुए हैं वही यह कौन सा जरूरी काम था जिसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों की पूरी फौज और पुलिस अपने सारे काम छोड़ कर खेत में बुलडोजर चलवाने के लिए पहुंच गई। आज के समय में जब स्कूल कॉलेज बंद चल रहे हैं। पठन-पाठन का कार्य लॉकडाउन के कारण स्थगित है तो आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी जो प्रशासनिक अधिकारियों को आनन-फानन में खुद खड़े होकर स्कूल को कब्ज़ा करवाने में स्कूल संचालकों की मदद करनी पड़ी।