कुशीनगर में बुधवार को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के उद्घाटन और महापरिनिर्वाण मंदिर में अभिधम्म दिवस समारोह में शामिल हुए विभिन्न देशों के राजनयिक और बौद्ध भिक्षु राज्य सरकार की तरफ से ‘बुद्ध का महाप्रसाद कालानमक चावल’ पाकर पुलकित हो गए। उन्होंने श्रद्धा से इस प्रसाद को नमन किया। कई ने इसे अपने देश के लिए और भेजने का आग्रह भी किया। 

कुशीनगर में आयोजित कार्यक्रम कई मायने में बेहद खास रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन, मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास करने के साथ ही कुशीनगर के लोगों को करोड़ो रुपये की 12 अन्य परियोजनाओं की सौगात दी तो महापरिनिर्वाण मंदिर में अभिधम्म दिवस का भी शुभारंभ किया। इस दौरान तथागत की महापरिनिर्वाण स्थली पर पर पधारे श्रीलंका के बौद्ध भिक्षुओं एवं बौद्ध अनुयायी देशों के राजनयिकों को कालानमक चावल जिसकी ख्याति बुद्ध के महाप्रसाद के रूप में है, का गिफ्ट हैंपर दिया गया तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। मान्यता है कि कालानमक चावल से बनी खीर को भगवान बुद्ध ने खुद ग्रहण किया, इसे अपने शिष्यों को प्रसाद रूप में दिया था। तभी से इस चावल को बुद्ध का महाप्रसाद कहा जाने लगा। 

200 बौद्ध भिक्षुओं और राजनयिकों को मिला उपहार

मंडलायुक्त रवि कुमार एनजी के मुताबिक कुशीनगर में आयोजित समारोह में करीब 200 बौद्ध भिक्षुओं और राजनयिकों को यह उपहार दिया गया। इनमें श्रीलंका, म्यांमार, कम्बोडिया, लाओस, वियतनाम, थाईलैंड, भूटान, दक्षिण कोरिया के राजदूत व मंगोलिया, सिंगापुर, जापान, नेपाल आदि देशों के वरिष्ठ राजनयिक व विशिष्टजन शामिल थे। कालानमक चावल का आकर्षक गिफ्ट हैंपर तैयार कराने वाले कृषि वैज्ञानिक डॉ रामचेत चौधरी कार्यक्रम के अगले दिन गुरुवार को हवाई अड्डे पर लाओस के राजदूत बूनेम चाउअंगल, कंबोडिया राजदूत उंग सेयन और म्यांमार के राजदूत मो चाव आउंग से मिलने ‘बुद्ध का महाप्रसाद’ लेकर पहुंचे। बुधवार को कुशीनगर में उपहार पा चुके, राजनयिक एक बार फिर भगवान बुद्ध की स्मृति से जुड़ा उपहार मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की। 

योगी सरकार में मिला कालानमक चावल का संरक्षण व संवर्धन

कालानमक चावल चावल भगवान बुद्ध की क्रीड़ास्थली सिद्धार्थनगर जिले का विशिष्ट कृषि उत्पाद है। यह अपने स्वाद, सुगंध और पोषण के मामले में बेजोड़ है। सिद्धार्थनगर जिले के साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसकी खेती कभी बड़े पैमाने पर होती थी लेकिन 2017 के पहले तक इसकी खेती 10 हजार हेक्टेयर तक सिमट गई थी। एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल होने पर इसे वैश्विक पहचान मिली। सरकार के सहयोग से कालानमक चावल के संवर्धन को लेकर सक्रिय संस्था पीआरडीएफ के वैज्ञानिक डॉ रामचेत चौधरी कहते हैं कि सरकार के प्रोत्साहन से कालानमक धान कि खेती का रकबा तेजी से बढ़ने लगा है। इस साल करीब 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती हो रही है।

गिफ्ट हैंपर मजबूत करेगा ग्लोबल ब्रांडिंग और डिमांड

 कुशीनगर में विदेशी मेहमानों को इसका गिफ्ट हैंपर दिए जाने से न केवल इसकी ग्लोबल ब्रांडिंग और मजबूत होगी बल्कि इसकी डिमांड भी तेजी से बढ़ेगी। कालानमक की खेती व प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए सिद्धार्थनगर में कालानमक महोत्सव आयोजित हुआ था, वहां 12 करोड़ रुपये की लागत से कॉमन फैसिलिटी सेंटर भी बन रहा है