आशा ज्योति केंद्र में महिला के फांसी लगाने का मामला गरमाता जा रहा है। अपनी करनी के चलते पुलिस फंस गई है। केंद्र की कर्मचारियों के बयानों के आधार पर सुदामा की मौत के पीछे पुलिस की लापरवाही उजागर हुई है। बुधवार को राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला ने केंद्र का निरीक्षण कर पूरी हकीकत जानी। उन्होंने खुद पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करने की बात कही। मंत्री ने बाथरूम (जहां घटना हुई) भी देखा। उन्हें बताया गया कि घटना के बाद पुलिस ने दबाव बनाकर मामला छुपाने का प्रयास किया था। पुलिस कमिश्नर से मिलने की बात कहकर मंत्री चली गईं

बाल विकास पुष्टाहार एवं महिला कल्याण राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला सबसे पहले वन स्टॉप सेंटर पहुंचीं। उन्होंने बाथरूम का भी निरीक्षण किया जिसमें सुदामा ने फांसी लगाई थी। उस एग्जास्ट फैन की मजबूती, महिला की लंबाई, मृतका के पैर जमीन को छू रहे थे या हवा में थे,चिटकनी खुली थी या बंद जैसे तथ्यों पर तैनात कर्मचारियों से सवाल जवाब किए। 
पुलिस ने धमकाया था
महिला कर्मचारियों ने बताया कि घटना के बाद थाना पुलिस दबाव डाल रही थी कि इसके बारे में किसी को कोई सूचना न दें। बावजूद इसके उन्होंने उच्चाधिकारियों को सूचना दी। इस पर पुलिस ने धमकी भी दी थी। मंत्री को पता चला कि वन स्टॉप सेंटर में बनी पुलिस चौकी में महिला दरोगा के अवकाश पर जाने के बाद चौकी खाली थी इस पर उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि चौकी खाली कैसे थी इस पर भी जांच होनी चाहिए। 
इन धाराओं में केस दर्ज कराने की बात कही 
मंत्री ने कहा कि महिला को केंद्र पर लाना गलत था। उसके बाद पुलिस की धमकी और गलत बात हुई। उन्होंने कहा, पुलिस ने जो काम किया उसमें धारा 306 (आत्महत्या के लिए प्रेरित करना), 325 (जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना), 330 (संस्वीकृति उद्यापित करने या विवश करके संपत्ति का प्रत्यावर्तन करना), 220 (प्राधिकार वाले व्यक्ति द्वारा जो यह जानता है कि वह विधि के प्रतिकूल कार्य कर रहा है, विचारण के लिए या परिरोध करने के लिए सुपुर्दगी करना) और दफा 34 के तहत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। जिला प्रोबेशन अधिकारी जयदीप सिंह और जांचकर्ता एसीएम-6 से भी घटना को लेकर उन्होंने जानकारी ली।