अयोध्या के संत जगद्गुरु परमहंसाचार्य को ताजमहल में प्रवेश से रोक जाने के मामले में बुधवार को सियासी पारा चढ़ गया। इधर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने संत को ताजमहल में प्रवेश से रोके जाने के मामले में बुधवार को अपनी रिपोर्ट पीएमओ और एएसआई मुख्यालय भेज दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि संत को ब्रह्मदंड रखकर जाने के बाद प्रवेश दिया गया। भगवा वस्त्रत्त् को लेकर की गई टिप्पणी ताजमहल परिसर की घटना नहीं है।
मामला बुधवार को तब गरमाया जब संतों ने ट्वीट पर ट्वीट करने शुरू कर दिए। इसके बाद एएसआई अधिकारी भी हरकत में आ गए। अधीक्षण पुरातत्वविद राजकुमार पटेल ताजमहल पहुंच गए। उन्होंने सीआईएसएफ अधिकारियों के साथ सीसीटीवी खंगालने शुरू कर दिए। शाम 05.33 बजे से 05.37 बजे तक की घटना को बार-बार देखा गया। उसमें संत और जवानों की बातचीत को सुना गया। कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई। उसके बाद पूरी रिपोर्ट बनाकर एएसआई मुख्यालय भेज दी गई। अधीक्षण पुरातत्वविद ने बयान जारी करते हुए कहा कि गाइडलाइन के अनुसार जगद्गुरु परमहंस दास को ब्रह्मदंड के साथ ताजमहल में जाने की अनुमति नहीं दी गई थी। ताजमहल में इस प्रकार की वस्तु प्रतिबंधित है।
हिंदू महासभा का एएसआई कार्यालय पर प्रदर्शन
इस घटना पर हिंदूवादी संगठनों में तीखा आक्रोश है। जिले में जगह-जगह विरोध जताया जा रहा है। हिंदू महासभा पदाधिकारियों ने माल रोड स्थित एएसआई कार्यालय पर प्रदर्शन करके आक्रोश जताया। वहीं राष्ट्रीय हिन्दू परिषद के अध्यक्ष गोविंद पाराशर ने भगवा वस्त्रत्त् पहनकर और दोनों हाथों में धनुष और झंडा लेकर ताजमहल में प्रवेश किया। माहौल को देखते हुए एएसआई कार्यालय पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि बुधवार को भगवा वस्त्रत्त् पहनकर ताजमहल में प्रवेश करने के दौरान किसी को भी नहीं रोका गया। राष्ट्रीय हिन्दू परिषद के अध्यक्ष गोविंद पाराशर का कहना था कि मंगलवार की घटना के विरोध में उन्होंने भगवा वस्त्रत्त् पहन कर ताजमहल में प्रवेश किया। उन्हें नहीं रोका गया। कैलाश मंदिर के महंत निर्मल गिरी ने वीडियो जारी कर इस मामले में तीखी टिप्पणी की है।